अंबिकापुर: ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल पर हवाला के जरिए एक करोड़ रुपये रिश्वत लेने का आरोप; दिल्ली सीबीआई कोर्ट में परिवाद दायर, डीजीपी को नोटिस

अंबिकापुर: छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पदस्थ ट्रेनी आईपीएस एवं तत्कालीन सीएसपी राहुल बंसल पर हवाला के माध्यम से एक करोड़ रुपये की रिश्वत लेने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में पीड़ित द्वारा दिल्ली की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में परिवाद दायर किया गया है, जिसके बाद कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के डीजीपी (DGP) को नोटिस जारी कर रिपोर्ट तलब की है। इस मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है।

क्या है पूरा मामला?

हरियाणा के रहने वाले आकाश कुमार ने दिल्ली स्थित सीबीआई (CBI) में शिकायत दर्ज कराई थी कि अंबिकापुर में पदस्थ ट्रेनी आईपीएस अधिकारी राहुल बंसल ने ठगी के एक मामले की जांच के दौरान दबाव बनाकर एक करोड़ रुपये की रिश्वत ली है।

  • हवाला के जरिए लेन-देन का आरोप: शिकायत के अनुसार, यह पूरी रिश्वत की रकम हवाला ऑपरेटरों के जरिए जमा कराई गई थी।
  • बिचौलियों की भूमिका: रिश्वत के इस सौदे में अंबिकापुर साइबर सेल में पदस्थ सहायक उपनिरीक्षक (ASI) प्रवीण कुमार राठौर और आरक्षक अंशुल शर्मा ने बिचौलियों के रूप में काम किया था।
  • ठगी का मूल मामला: यह पूरा विवाद अंबिकापुर के सदर रोड निवासी रवि मोहन गोस्वामी के खिलाफ दर्ज ठगी के एक मामले की जांच के दौरान सामने आया, जिसमें जांच के नाम पर कथित तौर पर एक करोड़ रुपये की मांग की गई थी।

सीबीआई कोर्ट में परिवाद और व्हाट्सएप चैट-ऑडियो क्लिप सौंपे गए

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब सीबीआई ने शुरुआती शिकायत पर एफआईआर दर्ज नहीं की, तो उसने दिल्ली की सीबीआई स्पेशल कोर्ट में धारा 175(3) के तहत परिवाद दाखिल किया।

  • किस-किस को बनाया गया पक्षकार: इस परिवाद में ट्रेनी आईपीएस राहुल बंसल, आरक्षक अंशुल शर्मा, एएसआई प्रवीण कुमार राठौर और स्वयं सीबीआई को भी पार्टी बनाया गया है।
  • सबूत: प्रार्थी ने कोर्ट में शपथ-पत्र के साथ-साथ व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट और ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सबूत के तौर पर पेश किए हैं। शिकायकर्ता ने 8 जून 2026 को सीबीआई निदेशक को लिखित शिकायत देकर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और बीएनएस की धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।

कोर्ट की कार्रवाई और डीजीपी को निर्देश

सीबीआई स्पेशल कोर्ट के न्यायाधीश सुधांशु कौशिक ने मामले की सुनवाई करते हुए सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया।

  • आईपीएस अधिकारी और अन्य पुलिसकर्मियों की ओर से उनके वकीलों ने कोर्ट में अपना जवाब पेश कर दिया है।
  • कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के डीजीपी को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है। डीजीपी की ओर से पेश अधिवक्ता ने जवाब के लिए एक माह का समय मांगा था, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। अब इस महत्वपूर्ण मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी, जिस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
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